जनचर्चा~~~

धड़ल्ले से चल रही भाझपा कि पैड न्यूज का गौपू कर रहा मैनेजमेंट~~

नेताजी फोटोछाप नेता के भरोसे लूट रहे झूठे जनसमर्थन कि वाहवाही~~

शैलेन्द्र पँवार ~~

         इन दिनों चुनावी सरगर्मी बहुत तेज हो चली है! यूँ तो कई बरसाती मेढक मैदान उतर चूके है लेकिन क्षैत्रिय जनता के लिये दो ही गुटो मे चुनौती मानी जाती रही है ! कहावत है कि बाप के पापो कि सजा बैटे को काटना ही पड़ती है! इन दिनों भाझपा के राजगढ़ के एक फोटोछाप नेता जो राजगढ़ नगर के फर्जी प्रेस क्लब अध्यक्ष बना फिरता है और इसी पर्जीवाड़े के बूते पर भाझपा मे मीडिया मेनेजमेन्ट का ठेका ले लिया ! इतना ही नही इसी गौपू उर्फ फर्जी प्रेस क्लब अध्यक्ष उर्फ फोटोछाप नेता ने कुछ फर्जी मीडियाकर्मीयो को मात्र दो-दो हजार मे संजू को बड़ा जनसमर्थन मिलने कि झूठी खबरों का खूब प्रचार-प्रसार किया और कर भी रहा है!
        हम बता दे कि राजोद कि जनता मे पूर्व बड़बोले नेताजी के विरुद्ध आज भी आक्रोश व्याप्त है और संजू तो बड़बोले नेताजी के भी दद्दु धरे है जो "मुँह पर राम और बगल मे छूरी" कहावत को चरितार्थ करने मे कोई कसर नही छोड़ते ! ये वही संजू है जिसके गूर्गे मनरेगा योजनाअंतर्गत होने वाले कार्यों मे ठेकेदारी प्रथा नही होने के बावजूद अपने दबाव प्रभाव से बड़े बड़े तालाब निर्माण के ठेके लेकर गरीबों कि मजदूरी के रूपये तक हजम कर जाते है और कोई पत्रकार मनरेगा का कार्य जेसीबी से होने का विडीयो बनाता है तो हमला करवा देते है! संजू को रिंगनोद कि जनता ने पहले अपार स्नेह देकर विजयश्री दिलाई थी लेकिन संजू वहां के विकास कार्य तो बताये ऐसा विपक्षीयो का कहना है, जो मौके पर सत्य भी पाया गया! विकास करते भी कैसे इन्हें और इनके गूर्गो को ताबल कि ठेकेदारी मे गरीबों का रूपया डकारने से फूरसत मिलती तब ना! खैर संजूलीला तो संजू और उसके गूर्गे ही जाने !
        इस वक्त हम बात कर रहे है गौपू उर्फ फर्जी प्रेस क्लब अध्यक्ष उर्फ फोटोछाप नेता कि जो इन दिनों फर्जी मीडियाकर्मीयो कि भीड़ दिखाकर मीडिया मेनेजमेन्ट के नाम पर अपनी भाझपा और संजू को पलीता लगा रहा है! इसके एवज मे फर्जी मीडियाकर्मीयो से झूठी वाहवाही लूटने के लिये महज 100-150 कि भीड़ को बड़ा जनसमर्थन बताकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है जबकि विपक्षी कि  500-600 के बड़े जनसमर्थन को केवल "जनसमर्थन" शब्द का प्रयोग कर दिया जा रहा है जो स्थानीय जनता के बीच चर्चा बनी हुई है! चुनाव आते हि नेताओं को जनता के दर्द दिखाई देने लगते है तो हम पुछना चाहते है कि इसके पहले नेत्र बंदकर कहां कि तपस्या मे लिन थे महाराज! पहले भी तो तुम्हारे नेताजी हि यहाँ के बादशाह बने फिर रहे थे तब क्यों जनता को पीड़ा प्रताड़ना का सामना करना पड़ा? ये चिंतन करने का विषय है!
        विगत पाँच वर्षों से  हमारे क्षैत्र कि गरीब जनता के दर्द और आँसुओं को हमने देखा है! हमने क्षैत्र कि उस गरीब बुढ़ी माँ के आँसू देखे है जिसके दो-दो बेटे है लेकिन पलायन करने पर विवषतावश एक भी पुत्र का सुख नही मिल पा रहा है! जो खोखले विकास के दावे कर रहे है वे आजतक उस बुढ़ी माँ को आवास, पेंशन, अन्त्योदय आदी योजनाओं मे से एक भी योजना का लाभ तक नही दिला सके! दलीतो को पानी के लिये आज भी आधुनिकता के इस दौर मे लोगों के हाथ जोड़ते देखा है! बड़ी विडम्बना है कि हमारे क्षैत्र मे राशनकार्ड मे कुत्ते को पुत्र बताकर राशन ले लिया जाता है तो सरकारी महकमे मे हड़कम्प मच जाती है लेकिन दसई मे एक बैटी को उसके हि पिता कि पत्नी दर्शा दिया जाता है तो बैटी को आज तक दफ्तरों के चक्कर लगाना पड़ रहा है और आज तक पिता पुत्री के पवित्र रिस्ते को राशन कार्ड मे पति पत्नी लिखकर संस्कृति कि धज्जीयाँ उड़ाई जा रही है!

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