****विचार न्यूज़ एक्सक्लूसिव ***
झाबुआ~द केरला स्टोरी के लेखक बुधवार को झाबुआ आये ....~~
ब्यूरो चीफ संजय जैन की सीधी बात-दि केरला स्टेारी फिल्म के लेखक सूर्यपाल सिंह के साथ/~~
द केरला स्टेारी फिल्म के लेखक सूर्यपाल सिंह बुधवार को झाबुआ आये थे। उन्होंने दोपहर तीन बजे बजे शारदा विद्या मंदिर बिलीडोज पर स्थानीय कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। सर्वप्रथम प्रवेशद्वार पर उनका बैंड बाजे के साथ स्वागत किया किया। तत्पश्चात पधारे मेहमान पूर्व प्रशासनिक अधिकारी सूरज रोकड़े(डामोर), पद्मश्री परमार दंपति और शारदा समूह के संचालक ओम शर्मा आदि के साथ मिलकर उन्होंने दीप प्रज्वलित किया।
शारदा समूह व भारतीय स्त्री शक्ति द्वारा किया गया स्वागत ......
शारदा समूह व भारतीय स्त्री शक्ति द्वारा उनका स्वागत व सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया। लेखक एसपी सिंह ने अपने उद्बोधन में विस्तृत रूप से फ़िल्म की कहानी को बयाँ किया। सभी को अपने धर्म और संस्कृति से जुड़ा रहना चाहिए। मुझे इस फ़िल्म की कहानी को लिखने में पूरे 2 वर्ष लगे। आगे उन्होंने कहा की अच्छी पुस्तको का सतत स्वाध्याय सभी को करना चाहिये। संचालक ओम शर्मा ने बताया हमारे झाबुआ जिले से सटे जिले धार के होनहार लेखक ने सफलतम द केरला स्टोरी जैसी फिल्म की कहानी लिखकर एक इतिहास रच दिया है,जिस पर जिले को ही नही पूरे प्रदेश को गर्व है। यह कोई साधारण कार्य नहीं है,इसके लिए बड़ी साधना करनी पड़ती है।कार्यक्रम का संचालन वंदना जोशी ने किया।
अधिकतर सभी लोगो ने सेल्फी.....
गौरतलब लेखक एसपी सिंह बिना कोई ओपचारिकता के सहज सेल्फी और फ़ोटो आमजन के साथ खिंचवाते रहे। छात्र-छात्राओं को अपना ऑटोग्राफ भी दिया । इस अवसर पर काफी संख्या में मीडिया कर्मी भी उपस्थिति थे, वे सभी से रुबरु भी हुए। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद ब्यूरो चीफ संजय जैन के साथ उनका सीधा संवाद हुआ,जो निम्नानुसार है.......
ब्यूरो चीफ संजय जैन की सीधी बात-द केरला स्टेारी फिल्म के लेखक सूर्यपाल सिंह के साथ......
प्रश्न- फ़िल्म में दर्शाया गया है कि जो धर्म को नही समझता है, उसे बरगलाना बेहद आसान है,इसके पीछे कोई तय उद्देश्य था...?
एसपी सिंह- देश मे आये दिन धर्म परिवर्तन के मामले देखें जा रहे है। फ़िल्म में ईसाई लड़की जिसे अपने धर्म के बारे में ज्ञान था, वह जरा भी विचलित नही हुई।वही जिस लड़की को धर्म का कोई ज्ञान नही था,वह पूर्ण रूप से गुमराह हो गयी थी। हमारा इसके पीछे सिर्फ एक ही उद्देश्य जनजागृति का था।
प्रश्न- देखा गया है कि किसी त्रासदी, हैवानियत या हृदय विदारक की सत्य घटनाओ पर फ़िल्म बनाकर निर्माता द्वारा करोड़ो की कमाई और अवार्ड पा लिए जाते है। जैसे की फ़िल्म टाइटैनिक जिस सत्य घटना नुसार इस हादसे में 1500 से अधिक लोगो की मौत हो गयी थी,उस पर जो फिल्माई गयी थी। फ़िल्म को अपार सफलता मिली और ऑस्कर के साथ कई अन्य अवार्ड भी मिले थे। यह घटना जिस परिवार के साथ घटी है क्या वे इस फ़िल्म को अवार्ड दे पाते यदि उनसे पूछा जाता तो.....?
एसपी सिंह-आपका यह सवाल अच्छा है। बॉक्स आफिस के आकड़ोनुसार फ़िल्म दि केरला स्टोरी 300 करोड़ के आंकड़े को छू चुकी है। लेकिन मैं आपको बता दु कि इसमें से डिस्ट्रीब्यूटर और अन्य लोगों में यह राशि बटने के बाद मात्र लगभग 51 करोड़ ही हमारे निर्माता को प्राप्त हुए है। हमारे निर्माता बड़े ही उदार दिल के है,उन्होंने इस राशि मे से 26 लाख की राशि पीड़ित परिवार को दी भी है। उनका उद्देश्य सिर्फसत्य घटना पर फ़िल्म बनाकर रुपये कमाना नही था।
प्रश्न- कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों का आरोप है कि आपने राज्य को बदनाम किया है और संघ की विचारधारा को प्रोत्साहित इस फ़िल्म के द्वारा किया है।
एसपी सिंह-पूर्व में भी कई राज्यो की घटना पर फिल्में बनी है। जैसे कि यूपी के गुंडाराज,कश्मीरी पंडित के मुद्दे पर दि कश्मीर फ़ाइल और अधिकतर कई फिल्मों में छत्तीसगढ़ को नक्सल वाद का गढ़ बताते हुए फिल्में बनायी गई है। तो क्या इन राज्यों की बदनामी हो गयी है,यह कह सकते है क्या.... .? रही बात कम्युनिस्टो की तो वह तो भारत देश मे बचे ही कहा है।जबकि सबसे बड़े देश चीन को कम्युनिस्ट देश कहा जाता है,वहाँ पर नागरिकों को गुलाम बनाकर रखा जाता है। तो इन आरोपो पर मैं क्या कहूँ.....?
आखरी प्रश्न- यह गर्व की बात है झाबुआ जिले से सटे जिले से आप आते है। जनता की ओर से हमारा प्रश्न है, जिले में पिछले दिनों हुई घटना जिसमें मामा-भांजी के पवित्र रिश्ते को अपनी हैवानियत के चलते तार तार-कर दिया था। मामा ने 5 वर्षीय भांजी के साथ दुष्कर्म कर उसकी रीड की हड्डी तक तोड़ दी थी और उसे मौत के घाट उतार दिया था। क्या भविष्य में आप इस घटना पर कोई फ़िल्म बनाने का मन बनाएंगे..?
एसपी सिंह- देखिये अभी हाल में ही साक्षी हत्याकांड हुआ,जिसे सभी ने देखा भी और सुना भी है। ऐसे हादसो पर हम फ़िल्म के माध्यम से ही प्रहार कर सकते है। रही बात जनता की तो मैं अवश्य मेरे क्षेत्र के अंचल मे हुई उपरोक्त दर्दनाक घटना पर यदि जनता का आशीर्वाद रहा तो फ़िल्म की कहानी लिखने और उस पर फ़िल्म बनाने की पूरी-पूरी कोशिश करूंगा। धन्यवाद।
फोटो०१-: ब्यूरो चीफ संजय जैन के साथ लेखक सूर्यपाल सिंह।



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